वाह रे जमाने तेरी हद हो गई,
बीबी के आगे मदर रद्द हो गई !
बड़ी मेहनत से जिसने पाला,
आज वो मोहताज हो गई !
और कल की छोकरी, तेरे
सर का ताज हो गई !
बीवी हमदर्द और मॉं सरदर्द
हो गई !
वाह रे जमाने तेरी हद ………
पेट पे सुलाने वाली, पैरों में सो
रही है !
बीवी के लिए लिम्का,
मॉं पानी को रो रही है !
सुनता नहीं कोई, वो आवाज
देते देते सो गई !
वाह रे जमाने तेरी हद ………
मॉं मांजती है बर्तन , वो सजती
संवरती है !
अभी निपटी ना बुढ़िया तू ,
इस लीये उस पर बरसती है !
अरे दुनिया को आई मौत,
मौत तेरी कहॉ गुम हो गई !
वाह रे जमाने तेरी हद ……….
अरे जिसकी कोख में पला,
अब उसकी छाया बुरी लगती है,
बैठे होण्डा पे महबूबा,
कन्धे पर हाथ जो रखती,
वो यादें अतीत की,
वो मोहब्बतें मॉ की,
सब रद्द हो गई !
वाह रे जमाने तेरी हद ………..
बेबस हुई मॉ अब,
दिए टुकड़ो पर पलती है,
अतीत को याद कर,
तेरा प्यार पाने को मचलती है !
अरे मुसीबत जिसने उठाई,
वो खुद मुसीबत हो गई !
वाह रे जमाने तेरी हद …….
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